
विक्रांत सिंह शेखावत
- भारत,
- 18-Mar-2025,
Share Market News: शेयर बाजार और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए हमेशा चर्चा का विषय रहा है। हाल के दिनों में शेयर बाजार में लगातार दूसरी बार तेजी देखने को मिली, जबकि सोने की कीमतों ने एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए 88,400 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर छू लिया। इस स्थिति ने निवेशकों को असमंजस में डाल दिया है कि आगे कहां निवेश किया जाए।
शेयर बाजार की मौजूदा स्थिति
शेयर बाजार पिछले कुछ महीनों में काफी उतार-चढ़ाव से गुजरा है। सितंबर के पीक से यह 10% से अधिक गिर चुका था, और अक्टूबर से फरवरी तक लगातार पांच महीने गिरावट दर्ज की गई थी। हालाँकि, हाल की तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर आशावान बना दिया है।इक्विटी-गोल्ड रेश्यो का महत्व
इक्विटी-गोल्ड रेश्यो निवेशकों के लिए यह समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है कि अगले कुछ वर्षों में कौन सा एसेट बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब यह रेश्यो 1 से कम होता है, तो शेयर बाजार अगले तीन वर्षों में बेहतर रिटर्न दे सकता है। मौजूदा समय में यह रेश्यो 0.86 है, जो 0.96 के लॉन्गटर्म एवरेज से कम है। इसका मतलब है कि अगले कुछ वर्षों में शेयर बाजार सोने की तुलना में अधिक मुनाफा दे सकता है।शेयर बाजार में संभावित तेजी
अगर सेंसेक्स और सोने के बीच का रेश्यो 1.2 से 1.4 के बीच रहता है, तो सेंसेक्स औसतन 7.78% रिटर्न देता है और सोना 19% का इजाफा दिखाता है। लेकिन अगर यह रेश्यो 0.8 से नीचे आ जाता है, तो सेंसेक्स 15% से 65% तक का रिटर्न दे सकता है, जबकि सोना 7% या उससे भी नीचे गिर सकता है।ऐतिहासिक परफॉर्मेंस
पिछले 15 वर्षों के आंकड़ों को देखें तो सोने ने औसतन 11.5% का सालाना रिटर्न दिया है, जबकि सेंसेक्स ने 10.3% का। हालांकि, पिछले 5 वर्षों में दोनों ने लगभग बराबर 14% का रिटर्न दिया है। यह दर्शाता है कि सोना दीर्घकालिक निवेश के लिए सुरक्षित विकल्प हो सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में शेयर बाजार में निवेश ज्यादा लाभदायक साबित हो सकता है।निवेशकों के लिए सलाह
- लॉन्ग-टर्म परिप्रेक्ष्य रखें: शेयर बाजार में निवेश लंबी अवधि के लिए करना फायदेमंद हो सकता है, खासकर जब इक्विटी-गोल्ड रेश्यो अनुकूल हो।
- डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो बनाएं: केवल एक ही एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय सोना और शेयर दोनों में संतुलित निवेश करें।
- मार्केट ट्रेंड्स पर नजर रखें: बाजार में तेजी और मंदी के रुझानों को समझें और उसी के अनुसार निवेश रणनीति बनाएं।