
- 30-Mar-2025 01:14 PM IST
- (, अपडेटेड 30-Mar-2025 08:21 PM IST)
कॅटगरी | एक्शन ,थ्रिलर |
निर्देशक | ए आर मुरुगादॉस |
कलाकार | अंजिनी धवन,काजल अग्रवाल,रश्मिका मंदन्ना,शर्मन जोशी,सत्यराज,सलमान खान |
रेटिंग | 2/5 |
निर्माता | नीरज सेठी,प्रशांत शर्मा,साजिद नाडियाडवाला |
संगीतकार | प्रीतम |
प्रोडक्शन कंपनी | सलमान खान फिल्म्स |
छायाकार | एस. तिरू |
संपादक | विवेक हर्षन |
लेखक | ए आर मुरुगादॉस |
रिलीज़ दिनांक | 30-Mar-2025 |
बजट | ₹ 200 crore |
अवधि | 02:15:00 |
फिल्म ‘सिकंदर’: सलमान खान का स्टारडम या दर्शकों की परीक्षा?
साल 2025 में सलमान खान की नई फिल्म ‘सिकंदर’ रिलीज होते ही चर्चा में आ गई, लेकिन इस बार फिल्म के लिए चर्चाएं सकारात्मक कम और नकारात्मक ज्यादा हैं। नाम भले ही ऐतिहासिक योद्धा ‘सिकंदर’ का हो, लेकिन फिल्म का इतिहास से कोई लेना-देना नहीं है। यह बस एक भावनात्मक लव स्टोरी है, जिसमें सलमान खान के स्टारडम का सहारा लेकर दर्शकों को खींचने की कोशिश की गई है। अफसोस, फिल्म में वह पकड़ नहीं दिखती, जो सलमान की पुरानी फिल्मों में नजर आती थी।
कहानी: ‘प्रेम रतन धन पायो’ पार्ट 2 की फीलिंग
फिल्म की कहानी में नयापन खोज पाना मुश्किल है। संजय राजकोट (सलमान खान) एक राजा हैं, जो देश के कुल सोने का 25% अकेले रखते हैं। वह एक युवती से शादी करते हैं, जो उनकी सुरक्षा को लेकर हमेशा फिक्रमंद रहती है। कहानी वहीं से शुरू होती है, जहां सूरज बड़जात्या की ‘प्रेम रतन धन पायो’ खत्म हुई थी—राजा साहब की जिंदगी, उनकी रियासत और उनकी प्रेमकथा।
हालांकि, फिल्म का दूसरा भाग ‘जय हो’ की थीम को दोहराता दिखता है। सलमान की पत्नी एक हादसे का शिकार होती है, मरते-मरते वह अपना दिल, फेफड़ा और आंखें दान कर देती है। संजय राजकोट उन तीन लोगों की रक्षा का प्रण लेते हैं, जिनमें उनकी पत्नी के अंग प्रत्यारोपित किए गए हैं। लेकिन अब उनकी पत्नी के अंगों को पाने वाले तीनों लोग एक खतरनाक नेता के निशाने पर हैं, क्योंकि उनके बेटे की हत्या हो जाती है। पूरी फिल्म में इसी संघर्ष को खींचने की कोशिश की गई है, लेकिन कमजोर पटकथा के चलते दर्शकों को बांध नहीं पाती।
अभिनय: सलमान की छाया, असली सिकंदर नदारद
फिल्म को देखते हुए कई बार ऐसा महसूस होता है कि स्क्रीन पर सलमान खान मौजूद ही नहीं हैं। लॉन्ग शॉट्स और बैक-टू-कैमरा शॉट्स में बार-बार यह शक होता है कि उनकी जगह बॉडी डबल शूट कर रहा है। उनके फिजिकल अपीयरेंस में बार-बार बदलाव नजर आता है। यह भ्रम फिल्म में किरदार के साथ दर्शकों की ट्यूनिंग बनने नहीं देता।
रश्मिका मंदाना, जो फिल्म में सलमान की पत्नी बनी हैं, का अभिनय औसत ही नजर आता है। उनके चेहरे पर भावनाओं की कमी खलती है। प्रतीक बब्बर का निगेटिव किरदार जबरदस्ती का लगता है, जिसमें अभिनय के बजाय ओवरएक्टिंग हावी रहती है।
निर्देशन: मुरुगादॉस की कमजोर पकड़
फिल्म का निर्देशन ए आर मुरुगादॉस ने किया है, जिन्होंने ‘गजनी’ जैसी जबरदस्त फिल्म दी थी। लेकिन ‘सिकंदर’ में उनकी पकड़ काफी कमजोर नजर आती है। फिल्म में असंगत सीन, बेतुके संवाद और जबरदस्ती डाले गए इमोशनल ट्रैक दर्शकों को निराश करते हैं। कहानी में कहीं भी पकड़ या सस्पेंस नहीं है, जिससे दर्शक फिल्म से जुड़ा महसूस कर सकें।
संगीत: भूलने लायक गाने
फिल्म का संगीत समीर अनजान और प्रीतम ने दिया है। हालांकि, गीत-संगीत दर्शकों के कानों में टिकता नहीं है। फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘हमने माना ये जमाना दर्द की जागीर है...’ भी पुरानी फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के गीत के असर को नहीं दोहरा पाता। गाने औसत हैं, जो रिलीज के कुछ हफ्तों बाद ही लोगों की प्लेलिस्ट से बाहर हो जाएंगे।
क्यों नहीं जम पाई ‘सिकंदर’?
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कहानी में नयापन नहीं: फिल्म की पटकथा में मौलिकता की कमी है। पहले देखी हुई कहानियों का मिश्रण ज्यादा लगता है।
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भावनात्मक जुड़ाव का अभाव: फिल्म में पात्रों के साथ दर्शकों की ट्यूनिंग नहीं बनती, जिससे इमोशनल ट्रैक भी फीका लगने लगता है।
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अभिनय में सच्चाई की कमी: सलमान खान की परफॉर्मेंस में स्टार पावर तो है, लेकिन अभिनय में गहराई नहीं।
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निर्देशन की ढिलाई: मुरुगादॉस फिल्म पर अपनी पकड़ बनाए रखने में विफल रहे हैं।
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संगीत का असरहीन होना: फिल्म के गीत यादगार नहीं हैं, जिससे फिल्म की लोकप्रियता और घट जाती है।
निष्कर्ष: सलमान का स्टारडम अब दर्शकों का टेस्ट नहीं पास कर रहा
‘सिकंदर’ एक बड़े बजट की फिल्म है, लेकिन इसकी आत्मा खोखली है। सलमान खान का स्टारडम ही इस फिल्म का एकमात्र आकर्षण है, लेकिन कमजोर कहानी, निर्देशन और अभिनय इसे डूबो देते हैं। सलमान के प्रशंसक शायद इसे देखने सिनेमाघरों में जाएं, लेकिन उनकी उम्मीदें फिल्म देखकर चकनाचूर हो सकती हैं।
रेटिंग: ⭐⭐ (2/5)
✔️ देखें अगर: आप सलमान खान के जबरदस्त फैन हैं।
❌ छोड़ दें अगर: आप एक मजबूत कहानी और बेहतरीन अभिनय की उम्मीद कर रहे हैं।