DeepSeek AI / चीन कर रहा है DeepSeek के जरिए जासूसी, रिसर्चर्स ने खोल दी पोल-पट्टी, कई देशों में लगा बैन

DeepSeek R1 AI लॉन्च होते ही विवादों में आ गया है। इस चीनी एआई टूल को अमेरिका, इटली और भारत समेत कई देशों ने बैन कर दिया है। रिसर्च फर्म Feroot सिक्योरिटी के मुताबिक, यह टूल यूजर्स के डेटा को चीन भेजता है। अमेरिकी एजेंसियों ने भी इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

DeepSeek AI: चीन की स्टार्टअप कंपनी डीपसीक द्वारा विकसित एआई टूल DeepSeek R1 AI हाल ही में लॉन्च होते ही विवादों में घिर गया है। अमेरिका समेत कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस एआई टूल पर आरोप है कि यह यूजर्स का डेटा चीन भेजता है। एक रिसर्च फर्म के अनुसार, डीपसीक के कोड चीन की सरकारी टेलीकॉम कंपनी चाइना मोबाइल से जुड़े हुए हैं, जिसे अमेरिका पहले ही बैन कर चुका है।

डीपसीक की जासूसी गतिविधियां उजागर

AP की एक रिपोर्ट के मुताबिक, DeepSeek R1 AI में ऐसे कोड मौजूद हैं, जो यूजर्स के लॉग-इन डेटा को चाइना मोबाइल को भेजते हैं। कनाडा स्थित साइबर सिक्योरिटी फर्म Feroot Security ने दावा किया है कि यह एआई टूल यूजर प्राइवेसी के लिए खतरा है। अन्य स्वतंत्र विशेषज्ञों ने भी इस दावे की पुष्टि की है कि डीपसीक एआई के माध्यम से संवेदनशील जानकारी चीन पहुंचाई जा रही है।

चाइना मोबाइल से जुड़े कोड का खुलासा

DeepSeek R1 AI के कोड को लेकर किए गए विश्लेषण में यह पाया गया कि इसमें चाइना मोबाइल के बैन किए गए सिस्टम का उपयोग किया गया है। अमेरिका ने 2019 में राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए चाइना मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, रिसर्च फर्म ने इस एआई टूल के कोड से संबंधित विस्तृत तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

यूजर लॉग-इन डेटा चोरी का खतरा

रिसर्च फर्म के अनुसार, यह एआई टूल यूजर की लॉग-इन जानकारी को चाइना मोबाइल को भेजता है। यह निष्कर्ष वेब लॉग-इन कोड के विश्लेषण के आधार पर निकाला गया है, हालांकि, DeepSeek R1 AI के मोबाइल वर्जन की अभी तक समीक्षा नहीं की गई है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैन की लहर

DeepSeek AI को सबसे पहले अमेरिकी राज्य टेक्सस ने बैन किया था, जहां सरकारी कर्मचारियों को इस एआई टूल का उपयोग करने से मना किया गया था। इसके बाद, अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और NASA ने भी इस पर प्रतिबंध लगा दिया।

अमेरिका के अलावा, इटली में भी DeepSeek AI पर बैन लगा दिया गया है। वहीं, भारत के वित्त मंत्रालय ने भी अपने कर्मचारियों को DeepSeek R1 AI और ChatGPT जैसे एआई टूल्स के इस्तेमाल से मना किया है।

ग्लोबल टेक्नोलॉजी पर चीन का बढ़ता प्रभाव

DeepSeek R1 AI पर लगे इन आरोपों ने चीन की प्रौद्योगिकी कंपनियों को लेकर वैश्विक चिंताओं को और बढ़ा दिया है। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने चीनी तकनीकी कंपनियों पर डेटा प्राइवेसी और राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण कई प्रतिबंध लगाए हैं।

निष्कर्ष

DeepSeek R1 AI पर लगे डेटा चोरी के आरोपों के चलते यह एआई टूल वैश्विक स्तर पर विवादों में घिर गया है। अमेरिका, इटली और भारत जैसे कई देशों में इसके इस्तेमाल पर बैन लग चुका है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह टूल यूजर्स की संवेदनशील जानकारी को चीन भेज सकता है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है। ऐसे में इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।