- भारत,
- 03-Apr-2025 05:00 PM IST
US Tariff War: रेसिप्रोकल टैरिफ वैश्विक व्यापार में संतुलन बनाने के लिए अपनाई जाने वाली नीति है। हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 26% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे कृषि, टेक्सटाइल और ऑटो सेक्टर प्रभावित होंगे। लेकिन यह नीति क्या है और इसका असर कैसे पड़ता है? आइए समझते हैं।
रेसिप्रोकल टैरिफ क्या होता है?
टैरिफ एक कर (टैक्स) होता है, जो किसी देश द्वारा आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य सरकार के लिए राजस्व जुटाना और घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना होता है। वहीं, 'रेसिप्रोकल' का अर्थ है "जैसा व्यवहार आप करेंगे, वैसा ही आपको मिलेगा।" यानी यदि एक देश दूसरे देश के सामान पर शुल्क बढ़ाता है, तो बदले में वही शुल्क उस देश के उत्पादों पर भी लगाया जाएगा।
रेसिप्रोकल टैरिफ कैसे काम करता है?
सरकार इस नीति का उपयोग व्यापार में निष्पक्षता सुनिश्चित करने और अपने घरेलू बाजार की रक्षा के लिए करती है। उदाहरण के लिए, यदि भारत अमेरिकी वस्तुओं पर 20% टैरिफ लगाता है, तो अमेरिका भी भारतीय वस्तुओं पर 20% शुल्क लगा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापार असंतुलन को कम करना और घरेलू उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है।
अमेरिका की टैरिफ नीति और भारत पर प्रभाव
अमेरिकी सरकार, विशेष रूप से डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में, टैरिफ को एक कूटनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करती रही है। ट्रंप ने कई देशों पर जवाबी शुल्क लगाए ताकि अमेरिका के व्यापार घाटे को कम किया जा सके और विदेशी सरकारों को अमेरिकी वस्तुओं पर ऊंचे कर लगाने से रोका जा सके।
भारत पर 26% रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के फैसले से भारतीय व्यापार पर व्यापक असर पड़ेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जो अमेरिकी बाजार पर निर्भर हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
इस टैरिफ से भारत की जीडीपी पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि अमेरिका भारत के लिए एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। यदि भारत भी जवाबी शुल्क लगाता है, तो दोनों देशों के व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं।